UPSC परीक्षा को पास कर कौन सबसे पहला सिविल सर्वेंट बना था।

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यूपीएससी (UPSC), भारत की सबसे कठिन परीक्षा लेकिन क्या आप जानते है इस सबसे कठिन परीक्षा को पास कर कौन सबसे पहला सिविल सर्वेंट बना था। पहले भारतीय सिविल सर्वेंट रबिन्द्रनाथ टैगोर के भाई सत्येन्द्रनाथ टैगोर थे।

सन 1842 में कोलकाता में जन्में सत्येन्द्रनाथ ने मशहूर ‘प्रेसिडेंसी कॉलेज’ से पढ़ाई की थे। वह एक बंगाली लेखक, साहित्यिक विद्वान और अनुवादक भी थे।

इंडियन सिविल सर्विस (ICS), जिसे आधिकारिक तौर पर ‘इंपीरियल सिविल सर्विस‘ के रूप में जाना जाता है। ब्रिटिश शासन के दौरान सन 1858 और 1947 के बीच ये भारत में ब्रिटिश साम्राज्य की ‘उच्च सिविल सेवा’ थी। ब्रिटिशकाल के दौरान सन 1861 में ‘इंडियन सिविल सर्विसेज एक्ट 1861’ के तहत ‘भारतीय सिविल सेवा’ का गठन किया गया। इसके बाद भारतीयों को भी इस परीक्षा को देने का अधिकार दिया गया। हालांकि अभी भी इसमें अंगेजों का ही दबदबारहा। बाद जून 1863 में सत्येंद्रनाथ टैगोर (पहले भारतीय) का चयन हुआ था। वह भारत के पहले भारतीय सिविल सर्वेंट बन गए।इससे पहले तक केवल अंग्रेज़ ही इस पद के लायक समझे जाते थे।

सत्येन्द्रनाथ टैगोर केसिविल सर्वेंट बनने के बाद भी 1871 तक, केवल चार भारतीय सेवा में शामिल हुए थे। 1883 तक, भारतीय ICS की कुल संख्या 12 थी और 1915 में, ICS की पहली प्रतियोगी परीक्षा के ठीक 60 साल बाद, केवल 63 भारतीय ICS में शामिल हुए थे। दिलचस्प बात यह है कि 1890 के दशक के अंत में, उद्योगपति जे.एन. टाटा ने विदेशों में अध्ययन करने के लिए भारतीयों के लिए एक छात्रवृत्ति कोष की स्थापना की, जिसमें शर्त के रूप में शामिल था कि वे आईसीएस परीक्षा देंगे – 1924 तक, सभी भारतीय आईसीएस अधिकारियों में से एक तिहाई से अधिक टाटा के विद्वान थे।