झारखंडी महापंचायत में खूब गरजे जयराम महतो और संजय मेहता

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झारखंडी भाषा खतियान संघर्ष समिति के द्वारा नगवां टोल प्लाजा के समीप हवाई अड्डा मैदान में झारखंडी महापंचायत का आयोजन किया गया। संजय मेहता के नेतृत्व में आयोजित इस सभा में 50 हज़ार से भी ज्यादा की संख्या में युवा साथी एवं झारखंडी लोग जुटे और बदलाव का शंखनाद किया। सभी ने स्थानीयता, माटी का नेतृत्व एवं झारखंडी हक अधिकारों को लेकर अपनी आवाज बुलंद की। एक महीने से महापंचायत की तैयारी कर रहे संजय मेहता एवं उनकी टीम का प्रयास रंग लाया। लोकसभा चुनाव से ठीक पहले इस बड़े सभा के माध्यम से युवाओं ने परिर्वतन की हुंकार भरी झारखंड में एक बड़े बदलाव का संकल्प लिया।

झारखंड वासीयों को एकजुट लड़नी होगी अपनी लड़ाई : जयराम महतो

महापंचायत में संबोधित करते हुए क्रन्तिकारी योद्धा जयराम महतो ने कहा कि झारखंड एक मुश्किल दौर में है। दो दशकों के बाद भी झारखंड में झारखंडियों के लिए नीतियाँ नहीं बन पायी है। आज तक स्थानीय नीति खतियान आधारित नहीं बन पायी है। नियोजन नीति भी अब तक नहीं बन पायी है। झारखंड की जमीनों को लूटा जा रहा है।

60: 40 नियोजन नीति झारखंडी जनमानस को स्वीकार्य नहीं है। पुनर्वास की भी नीति नहीं बन पायी है। जमीनों की लूट अत्यंत चरम पर है। ऐसे में सभी झारखंड वासियों को एकजुट होकर यह लड़ाई लड़नी होगी। नहीं तो सबकुछ लूट जाएगा। हमारे ऊपर चारो तरफ से हमला है। आज नहीं जागे तो हमारी पीढ़ियाँ बर्बाद हो जाएगी। हमारे बाल – बच्चे बेघर हो जाएंगे। अगली पीढ़ी बहुत मुश्किल में चली जाएगी।

झारखंड में बड़े स्तर पर राजनीतिक एवं नीतिगत सुधार की जरूरत : संजय मेहता

झारखण्डी महापंचायत में संजय मेहता खूब गरजे। उन्होंने कहा कि झारखंड निर्माण के बाद से झारखंड की माटी से छल होता आ रहा है। यहाँ के नौकरी, संसाधन, अवसर, नेतृत्व पर से झारखंडियों का अधिकार छीन लिया गया है।

अपनी जमीनों पर झारखण्डी ही बेघर हो गए हैं। उन्हें मौका नहीं दिया जा रहा है। झारखण्डी जनमानस के समक्ष एक अंधकारमय भविष्य है। किसानों के खेत ले लिए गए, उन्हें उचित मुआवजा नहीं मिला। कोयला, खनन, प्लांट, उद्योग का प्रदूषण झारखंडियों ने सहा। बीमारियां हमें मिली। जुल्म भी हमें मिला। केस, मुकदमे, लाठियाँ भी हमने सही। हमारी, नौकरी पर भी कब्जा कर लिया गया। फिर भी हमारी आवाज न केंद्र सुनती है न राज्य।

राज्यपाल के रास्ते से झारखण्डी हक अधिकार के विधेयक को अटका दिया जाता है। केंद्र और राज्य सरकार ने मिलकर झारखंड को लूटा है। केंद्र ने हमारे संसाधनों को लूटा तो सरकारी संरक्षण में झारखंड की नौकरशाही ने यहाँ की जनता को लूटा। जानबूझकर झारखंड की नियुक्तियों में पेंच फंसा दिया जाता है। ऐसे में झारखंड में बड़े स्तर पर राजनीतिक एवं नीतिगत सुधार की जरूरत है।

इसके लिए राज्य के युवाओं को आगे आना होगा। आज यदि युवा नेतृत्व की जिम्मेवारी नहीं लेंगे तो राज्य पुनः अंधकार में चला जायेगा। झारखंड को एक बड़े पॉलिटिकल रिफॉर्म की जरूरत है। यहाँ विजन वाला नेता चाहिए। जिन लोगों पर भी भरोसा किया गया उनलोगों ने झारखंड को लूटा है। ऐसे में हमें अपनी आवाज को बुलंदी के साथ रखना होगा।

हम इस बात को लेकर संकल्पित हैं कि हमारी जमीनों का मुआवजा उचित तरीके से दिया जाए। हमें पुनर्वास नीति का लाभ मिले। सीएसआर के तहत झारखंडियों को लाभ मिले। हमे हमारी नौकरी के अवसर को प्राप्त करने का अधिकार न छीना जाए। हम यह चाहते हैं कि संविधान के तहत प्रदत अधिकारों को हमें दिया जाए। हम कोई भी असंवैधानिक माँग नहीं कर रहे हैं। स्थानीयता, नियोजन, पुनर्वास, ओबीसी आरक्षण, जातिगत जनगणना, सरना धर्म कोड़, तृतीय चतुर्थ वर्ग की नौकरी की झारखंडियों के लिए आरक्षित हो, पुनर्वास आयोग का गठन हो, प्रतियोगी परीक्षा समय पर हो, परिणाम समय पर हो। ऐसी तमाम माँगों को लेकर हम सब संकल्पित हैं। जब तक यह अधिकार नहीं मिल जाता। हम सब मिलकर लड़ेंगे और संघर्ष करेंगे।

महापंचायत में झारखंडी कलाकार सूरज टाइलोन, बबन देहाती, सुनील सजनवा एवं सावित्री कर्मकार ने अपने गीतों के माध्यम से उपस्थित जनसमूह को झारखंड बचाने का संदेश दिया।

सभा में क्रांतिकारी योद्धा मोतीलाल महतो, रांची से दमयंती मुंडा, चतरा से सुनील महतो एवं उगन भुइयां, पलामू से प्रीति पासवान एवं दिलीप मेहता, बड़कागाँव से नकुल महतो एवं राकेश मेहता, मांडू से संजय महतो, रामगढ़ से रूपा महतो एवं योगेश भारती, बरही से भुनेश्वर यादव, बरकट्ठा से महेंद्र प्रसाद, उदय मेहता, राजदेश रतन, पूजा महतो, आजाद हुसैन, सूरज साहू, रिजवान अंसारी, प्रेम नायक, फरजान खान, राजेश महतो सहित कई झारखंडी वक्ताओं ने संबोधित किया एवं झारखंडी भावना के अनुरूप अपनी राय रखी।

झारखण्डी महापंचायत में लिए गए तीस संकल्प

1. झारखंड की स्थानीय नीति खतियान आधारित हो।

2. झारखंड की नियोजन नीति में झारखंडियों के लिए प्राथमिकता तय हो।

3. तृतीय और चतुर्थ वर्ग की नौकरी में झारखंडियों को 90 प्रतिशत आरक्षण मिले।

4. निजी क्षेत्र की कंपनियों में स्थानीय को 75 प्रतिशत नौकरी का विधेयक को सख्ती से लागू किया जाए।

5. झारखंड में जेटेट की परीक्षा जल्द से जल्द ली जाए।

6. सभी प्रतियोगी परीक्षा ससमय एवं पारदर्शी तरीके से हो। ससमय परिणाम जारी किया जाए।

7. झारखंड में ओबीसी को आरक्षण आबादी के अनुरूप दिया जाए। कम से कम 27 प्रतिशत आरक्षण अवश्य दिया जाए। हाईकोर्ट के फैसले के आधार पर नगर निकाय चुनाव में ट्रिपल टेस्ट के आधार पर ओबीसी आरक्षण लागू किया जाए।

8. झारखंड में भी जातिगत जनगणना करायी जाए।

9. झारखंड में पुनर्वास आयोग का गठन हो।

10. आदिवासियों को सरना धर्म कोड दिया जाए।

11. हज़ारीबाग में हवाई अड्डा के निर्माण की प्रक्रिया को प्रारंभ किया जाए।

12. खनिज संसाधनों के राजस्व में ग्राम सभा को अधिकार दिया जाए।

13. झारखंड के टेंडर में आरक्षण प्रणाली को लागू किया जाए। साथ ही झारखंडियों के लिए संविदा में आरक्षण की व्यवस्था हो।

14. सभी खनन क्षेत्र एवं अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में ट्रांसपोर्टिंग, लिफ्टिंग, उठाव, चढ़ाव आदि कार्य स्थानीय को दिए जाएं।

15. झारखंड के सभी लोकसभा एवं विधानसभा सीटों पर स्थानीय सांसद, विधायक बने इसका संकल्प लेते हैं।

16. ट्राइबल सब प्लान का पैसा आदिवासियों के विकास में खर्च किया जाए।

17. सभी खनन एवं औद्योगिक क्षेत्रों में प्रदूषण की स्थिति चरम पर है। इसे कम किया जाए एवं जनजीवन के लिए स्वच्छ वातावरण उपलब्ध कराया जाए।

18. झारखंड में जितने भी जमीनों का अधिग्रहण किया गया। उन सभी जमीनों के रैयतों को उचित मुआवजा दिया जाए। उनके जीवन के लिए बेहतर पानी, बिजली, शिक्षा स्वास्थ, खेलकूद, रोजगार की व्यवस्था की जाए।

19. झारखंड में प्रखंड, अंचल एवं थाना स्तर पर करप्शन चरम पर है। जमीन के म्यूटेशन एवं थाना में प्राथमिकी दर्ज करने में करप्शन खत्म करने का संकल्प लिया गया।

20. झारखंड के सभी थाना में एक स्वागत कक्ष बने जिसमें आगंतुकों को पहले सम्मान से बैठाया जाए। उन्हें पानी, चाय दिया जाए। फिर उनकी समस्या, प्राथमिकी आवेदन को जिम्मेवारी के साथ स्वीकार करते हुए कार्य प्रारंभ किया जाए।

21. नेतरहाट विद्यालय में नामांकन में हो रहे गड़बड़ी को तत्काल रोका जाए।

22. सीएनटी, एसपीटी कानून को सख्ती से लागू किया जाए।

23. स्थानीय स्वाशासन प्रणाली को मजबूत किया जाए। ग्राम सभा को पूर्ण अधिकार दिया जाए।

24. पेसा कानुन 1996 एवं वनाधिकार कानून 2006 का समुचित क्रियान्वयन किया जाए। समुचित रूप से वनाधिकार पत्र निर्गत करने तथा आदिवासी वनाश्रित ग्रामीणों पर शोषन उत्पीडन बंद हो।

25. जेपीएससी की नियुक्ति प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा किया जाए।

26. राज्य सरकार के सभी रिक्त पदों को भरने की जल्द शुरू की जाए।

27. राज्य सरकार की नियुक्तियों में सरकार आउट सोर्सिंग एजेंसी को लाना बंद करे। सरकार सीधे संविदा पर नियुक्ति ले।

28. संविदा आधारित नियुक्ति में स्थायी समायोजन की प्रक्रिया को जल्द पूर्ण किया जाए। इसमें झारखंडी को प्राथमिकता दी जाए।

29. पीजीटी शिक्षक परीक्षा में हुई धाँधली की जाँच हो।

30. आरआरबी द्वारा निकाले गए 5696 सहायक लोको पायलट की परीक्षा में पदों की संख्या बढ़ाकर पचास हज़ार किया जाए। यह माँग केंद्र सरकार से है।

 

सभा को सफल बनाने में सक्रिय रूप से आर्यकांत मेहता, कुणाल मेहता, राजदेश रतन, महेंद्र प्रसाद, संजय महतो, सूरज साहू, प्रेम नायक, श्री राज मेहता, डॉ राजेश, अजय राणा, मोहम्मद आजाद, फरीद, अल्तमस, रिजवान, जानिशार आलम, सराफत, दिनेश महतो, विकास, वरुण, मंटू मेहता, उदय मेहता समेत सैकड़ों लोगों का मुख्य योगदान रहा।